आपको कितनी देर सोना चाहिए | How much sleep do you need

आपको कितनी नींद चाहिए (How much sleep do you need):


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अगर आप ये जानने में दिलचस्पी रखते है की आपको कितने घंटे सोना चाहिए (How much sleep do you need) तो आप सही जगह पे पहुँचे है।  दोस्तों इससे समझने के साथ ही हम ये भी देखेंगे की आइंस्टाइन और Edison  जैसे जग विख्यात लोग अपने जीवन काल में कितने घंटे की नींद लेते थे और हमारे जीवन में सोने का क्या महत्त्व है और हमारे जैसे दुनिया में और कितने प्राणी है जिनकी नींद अविश्वसनीय है। अगर आपको नींद के बारे में A to Z ज्ञान प्राप्त करना है तो आपको ये आर्टिकल पूरा पढ़ना चाहिए। 

हम कितनी नींद लेते है? (How much we sleep?)

How much we sleep


दोस्तों हम मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जोकि 2-14 घंटे सो लेता है। लेकिन हमें तो औसतन जानने की ज़रुरत है।  हम मनुष्य औसतन 8 घंटे सोते है। इस 8 घंटे के दौरान हम निंद्रा से गहरी निंद्रा और सपनो में खो जाते है।  अगर हम हमारे 8 घंटे की नींद की गणना करे तो हर 24 घंटे मेसे 8 घंटे नींद में निकाल देते है यानी की हमारी उम्र के 23 साल हम सोने में निकाल देते है।  अगर इसका विश्लेषण किया जाए तो कई महानुभाव ये कहते है की ये हमारे लिए अति आवश्यक है ताकि हमारे शरीर और मष्तिष्क को आराम मिल सके और हमें दिन भर जो भी काम करने से थकान हुई है चाहे वह शारीरिक हो या मानशिक हो वोह थकावट दूर हो सके।  लेकिन, कई महानुभाव ऐसेभी है जो ये मानते है जो ये 23 घंटे हम नींद में व्यतीत करते है वोह हमारे जीवन का पूर्णतः बिगाड है। अब नींद हमारे लिए अतिमहत्वपूर्ण है या समय की बर्बादी है इसका जवाब तो कोई ज्ञानी ही दे सकते है और ये एक चर्चा  विषय है।  लेकिन, जब हम नींद में होते है तो हमारे साथ क्या होता है वोह तो हम जान ही सकते है।  तो चलिए जानते है। 

नींद में हमारे साथ क्या होता है? (What happens to us in sleep?) 


What happens to us in sleep?

दोस्तों, चाहे आप बड़ी-बड़ी ऑफिस में वाइट कोलर जॉब करे या फिर खेत मज़दूरी करे आपको दिन में कुछ घंटे तो आपके शरीर को आराम देना ही पड़ता है।  आपका दिमाग हर सेकंड कुछ  डेटा प्रोसेसिंग करता ही रहता है जो की एक मशीन की तरह है जब तक आप नींद नहीं लेते तब तक आपका दिमाग हर वक्त काम पे लगा रहता है।  इतना ही नहीं आपके  हाथ, पैर, गर्दन, आपके शरीर का हर वोह हिस्सा जो की मूवेबल है वोह कही न कही थकान महसूस करने लगता है।  आप जब नीद लेते है तब आपके शरीर की हर गतिविधि हर हलचल आंशिक बंध हो जाती है या फिर कम हो जाती है। जैसे की आपके हाथ और पैरो का हिलना ना के बराबर हो जाता है आपका दिल भी उन  चंद घंटो के लिए आराम महसूस करता है क्योकि जब हम काम करते है तो शरीर का कोई न कोई हिस्सा ऐसा होता है जिसको ज़्यादा खून की आवश्यकता महसूस होती है लेकिन जब हम नींद लेते है तो शरीर का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं होता जिसे ज़्यादा खून की आवश्यकता पड़े।  इसलिए हमारा दिल भी आराम से धड़कता है।  इसलिए हमारी ऊर्जा भी कम खर्च होती है। जब हम नींद लेते है तब हमारी पांचो इन्द्रिया भी कुछ हद तक जो डेटा दिमाग तक पहुँचाती है इसमें भारी कमी होती है जिसके कारन हमारा दिमाग भी ज़्यादा काम नहीं करता और जो कोष है उनको आराम मिल जाता है। और जब हम नींद पूरी करके उठते है तो हमें एकदम फ्रेश महसूस होता है और अच्छे और क्रिएटिव विचार आते है। तो सभी बातो से तो ऐसा ही लगता है की हमारी नींद अति आवश्यक चीज़ो में से एक है लेकिन कुछ लोग ऐसा नहीं समझते। तो आइये जानते है की कोन है वोह महानुभाव और उनका नींद के बारे में क्या ख्याल है....  


Benjamin Franklin (Founding Fathers of the United States.


Benjamin Franklin


"Early to bed and early to rise, makes a man healthy, wealthy, and wise" अब इसका मतलब है की  जो रोज़ जल्दी सो जाये और सुबह जल्दी उठे वोह मनुष्य स्वस्थ, धनवान और बुद्धिमान होता है। अब ये कहना है Mr. Benjamin Franklin का जोकि अमेरिका के स्थापक यानी Founding Father थे। बेंजामिन फ्रेंक्लिन ने इस कहावत को अपने जीवन का गुरु मंत्र बना रखा था। इसको उन्हों ने अपने पुरे जीवन में बखूबी अप्लाई किया। वोह हर रोज़ रात को 10 बजे सो जाते थे और सुबह 4 बजे जग जाते थे और अपने काम में लग जाते थे। जिसकी वजह से उनके दिमाग में कई सारे ऐसे ख्याल आये जिसे आप इग्नोर नहीं कर सकते। जैसे की Bifocals (द्रिकेन्द्रिय चश्मा) भी उन्ही के दिमाग की खोज है साथ ही साथ जो आसमान में बिजलिया कड़कती है वोह कैसे और क्यों कड़कती है उनका जवाब भी उन्ही के 4 बजे उठ जाने वाले दिमाग की उपज है। अक्सर हमने बड़ी बड़ी इमारतों पे लोहे के बड़े बड़े रोडस (सलिये) लगे हुए देखे है जिसे Lightning Rod कहा जाता है  इस चीज़ के पीछे के साइंस का उन्होंने ही खुलासा किया था। Benjamin Franklin बहुमुखी व्यक्तित्व रखते थे जैसे की वैज्ञानिक, संशोधक, पब्लिक लीडर, विचारक, लेखक। उनके मुताबिक इन् सब चीज़ो के पीछे उनका गुरु मंत्र था  "Early to bed and early to rise, makes a man healthy, wealthy, and wise"  

अब ये तो हुई Benjamin Franklin की बात जो हररोज़ शार्प 10 बजे नींद लेते थे और सुबह शार्प 4 बजे उठ जाया करते थे। लेकिन कई और महानुभाव ऐसे भी है जो की कभी कभी 30 मिनट से ज्यादा की नींद नहीं लेते थे। और वोह इतने फेमस है की बच्चा बच्चा उनका नाम एक खास आविष्कार के लिए जानता होगा जिनका नाम है थॉमस एडिशन तो चलिए उनकी नींद कभी विश्लेषण किया जाए की वोह कितने घंटे सोते थे और उनसे उनको क्या फायदा हुआ और उनसे हमें क्या फायदा हुआ?

लेकिन उससे पहले अगर आपको इस टॉपिक के बारे में और जानना चाहते है तो हमारा ये वीडियो अवश्य देखे और नींद से जुडे इस आर्टिकल का पूरा विश्तृत में ज्ञान प्राप्त करें। 

 

Thomas Edison  (दिमाग की बत्ती जली?)


Thomas Edison

 अगर आपके दिमाग की बत्ती जल गई तो आपको पता चल गया होगा की ये जो Thomas भैया है उन्होंने आपके घर और ऑफिस में लगे हुए बिजली के बल्ब की खोज करके दुनिया बदल दी थी। सिर्फ बिजली के बल्ब की ही नहीं और भी ढेरो खोज की थी लेकिन जो सबसे फेमस खोज है वोह बिजली के बल्ब की है। तो दोस्तों खोज तो अभूतपूर्व है ही लेकिन इनकी नींद के चर्चे भी अभूतपूर्व है। जी है इनकी नींद अविश्वशनीय है जिसके बारे में सुन कर आप चौंक जायेंगे। लेकिन, इससे पहले ये जान लेते है की जो हमारे Thomas भैया है उनका नींद के बारे में क्या अभिप्राय है? तो हमारे जो Thomas भैया है वोह नींद को 'A  Heritage From our caves days' कहते थे यानी की हमारी जो नींद है वोह हमारे पूर्वज आदिमानव से हमें वारसे में मिली है ऐसा सोचना था उनका। उनका ये मानना था की 24 घंटो मेसे 6-7 घंटे सोने में निकलना वह समय की बर्बादी है। तो क्या Edison भैया नींद लेते थे या नहीं? बेशक वोह नींद लेते थे क्योकि अगर नींद न ले तो इंसान पागल जल्दी हो सकता है। Edison भैया नींद तो लेते ही थे लेकिन वोह 30 मिनट यानी आधे घंटे की छोटी छोटी झपकीया मारा करते थे वोह भी दिन में सिर्फ 5 बार यानी की टोटल ढाई घंटे वोह नींद में बिताते थे और हर झपकी  के बाद वोह फिर अपनी लैब में आके खोज करने में जूट जाते। तो दोस्तों जहा हम दिन के 6-8 घंटे सोने में निकाल देते है वह एक Edison थे जो की दिन में सिर्फ ढाई घंटे ही सोते थे और उन्होंने अपने जीवनकाल में 1300 के करीब खोजे की है। अब चलते है तीसरे महानुभाव पे जोकि ऐसेही एक सिद्ध और प्रखर वैज्ञानिक के तौर पे जानेजाते है और ऐसा भी कहा जाता है की उन्होंने अपने जीवन काल में सबसे ज़्यादा अपने दिमाग का इस्तमाल किया है जो की और किसीने आज तक नाही किया। सायद आप पहचानही गए होंगे की कोन है वोह महानुभाव्.... जी है वे और कोई नहीं Einstein ही है। तो आइये दोस्तों, जानते है की आइंस्टाईन का नींद के बारे में क्या तर्क-वितर्क थे और क्या सोचना था। 


Albert Einstein ()


Albert Einstein

अगर आप Albert Einstein के बारे में जानते है इसका मतलब आप शायद Theory of Relativity के बारे में याफिर  फार्मूला के बारे में जानते होंगे या जानने की इच्छा रखते होंगे क्योकि ये दोनों चीज़े आइंस्टीन की जीवन की सबसे प्रचलित खोजो मेसे एक है। लेकिन इन सब का हमारे आर्टिकल के साथ एक लिंक भी है यानी की आइंस्टीन की नींद का उनकी उपलब्धियों के साथ का कनेक्शन। एक इंटरव्यू में आइंस्टाईन ने बताया था की अगर उन्हें दिन में 10 घंटे की कमसे कम नींद ना मिले तो उनका दिमाग काम करना बंध कर देता है इसलिए उनको दिन में कम से कम 10 घंटे की नींद तो चाहिए ही चाहिए। अगर उनको उससे काम नींद मिले तो उनको कोई नए सुझाव या आईडिया आते ही नहीं है। 

एक तरफ एडिसन भैया है जो सिर्फ ढाई घंटे की नींद से काम चला लेते है और एक तरफ आइंस्टाइन चचा है जिनको कम से कम १० घंटे की नींद तो चाहिए। तो अब आप ही बताइये जनाब की इन् बातो से आपको क्या लगता है की किसकी थ्योरी ज़्यादा अच्छी है। क्योकि हमने जो तीन महानुभाव के बारे में बताया वोह तीनो वैज्ञानिक थे, तीनो ने पूरी दुनिआ को अपने आविष्कारों से नइ दिशा दी, तीनो अपने अपने क्षेत्र यानी की वैज्ञानिकी में टॉप लेवल पे है तो माने तो माने किसकी? ये तीनो मनुष्य ही है यानी की Homo Sapiens  थे अगर इनमे इतनी विशेस्ताए देखि जा रही है।  अब हम तो कर रहे है विज्ञानं की बात यानी की शरीर विज्ञान तो अगर विज्ञान की बात करे और प्रयोग से पला न पड़े तो कहे का विज्ञान...  तो आइये एक प्रयोग से समझते है की भाई ये नींद हमारे लिए कितनी आवश्यक है और अगर उसकी पूर्ति ना की जाए तो क्या होता है। 

विज्ञान की प्रयोग वाली भाषा (Understand with experiment) 


Experiment With Sleep

दोस्तों, ऊपर जो हमने तीन उदहारण देखे उससे हमें ये तो पता चल ही गया की दिमाग और नींद के घंटो का कोई सीधा लेना-देना नहीं है लेकिन हम ये माँके चल सकते है की हमारे इतने थकावट भरे दिन में से दिमाग और शरीर को कुछ घंटे तो आराम देना ही पड़ता है। सालो पहले जब वैज्ञानिक ये मानते थे की जितना Sleeping Hours ज़्यादा उतना दिमाग अच्छा काम करेगा इसको प्रूफ करने के लिए उन्होंने वॉलेंटियर्स के दो ग्रुप बनाये एक ग्रुप को 11 दिनों तक नींद नहीं लेनी दी गयी और दूसरे ग्रुप को पुरे दिन मेसे 2-3 घंटे की ही नींद लेने दी गई जब 11 दिन पुरे हुए तो जो पहला ग्रुप था उनको तो दिन में तारे दिखने लगे यानी की उनका दिम्माग काम करना बंध हो चूका था उनको सब काल्पनिक दिखने लगा और उनको ट्रीटमेंट के लिए भेजा गया ल्र्किन जो दूसरा ग्रुप था उनके रूटीन में ज़्यादा बदलाव नहीं देखनेको मिला था। उनका दिमाग ऐसा ढल चूका था की कम नींद लेके ज़्यादा काम कैसे किया जा सकता है इस प्रयोग से ये तो पता चल गया की हमारे दिम्माग और शरीर को आराम  चाहिए लेकिन ऐसा कोई फिक्स नियम नहीं है की 8 घंटे या फिर 10 घंटे का काम से काम नींद लेनी ही पड़े तो ही हमारा दिमाग अच्छी तरह काम कर सके। आइये एक रियल लाइफ उदहारण लेके हम समजते है की अगर बिना नींद लिए हम कई दिनों तक सिर्फ काम करते रहे तो हम्मरे साथ क्या  है?

Work Machine Nikola Tesla  


Nikola Tesla

 

अब ऊपर की सब लिखावट से आपको ये तो समज आ गया की कुछ घंटे का दिमाग को रेस्ट आवश्यक है अगर उसे ना लिया जाए तो हमारे दिमाग Fatigue यानी थकावट महसूस करने लगता है उसका गंभीर परिणाम ये है की हम दिमागी संतुलन खो सकते है यानी की Mental Break Down निकोला टेस्ला जो की Alternating Current की खोज के कारन जाने जाते है उनके केस में देखा गया।  निकोला टेस्ला दिन की सिर्फ दो घंटे की नींद लेने के लिए आदि थे जो की कभी-कभी तो वे 84 घंटे अपनी लैब में बंध हो कर अपने प्रयोगो मे लगे रहते थे अब आप उनकी काम के प्रति उनकी रूचि या निष्ठां कहे या अपने शरीर के प्रती लापरवाही कहे वोह आपकी निजी सोच है लेकिन इसका परिणाम आया की महज़ 25 साल की उम्र में उनको Mental Break Down से उनको गुज़रना पड़ा। 

इतना जानने के बाद हमें ये तो पता चल ही गया की नींद जैसी सामान्य चीज़ भी कितनी जटिल है। जिसपे हमने कभी भी फोकस नहीं किया वोह नींद पे अगर ध्यान न दिया जाए तो मनुष्य को पागल बना सकती है लेकिन अभी भी शंशोधक ये  कर पाए है की हमें नींद की ज़रुरत आखिर क्यों है? अगर हम ये सोचे की नींद की ज़रुरत हमारे दिमाग को आराम देने के लिए है तो अमेरिका का स्लोथ नामक एक प्राणी कटो दिन के 24 घंटो मेसे 20 घंटे सोता ही रहता है? जबकि वोह अपने दिमाग ज़रा भी तस्ति देता नज़र नहीं आता है और एक तरफ हम मनुष्य है जो की दिन का हर काम  ही करते है फिर भी औसतन सिर्फ 8 घंटे की ही नींद लेते है। इस तरह से देखे तो हमारी नींद 20 घंटो से लम्बी नहीं होनी चाहिये? 

दूसरी बात: अगर नींद का काम दिमाग के स्नायु को आराम देना ही है तो हर वक्त इधर से उधर दौड़ते हुए Pygmy Shrew जात के छछूंदर जो की पिग्मि कहलाता है उसको कितनी नींद लेनी चाहिए? इस लिए हम नींद को आराम के साथ या फिर हमारी या प्राणिओ की एक्टिविटी के साथ कंपेर नहीं कर सकते क्योकि हर प्राणी अपने आस पास के वातावरण के अनुरूप नींद लेनेका आदि हो चूका है। अगर आपको इस बात का विश्वास नहीं है तो चलिए हम इसको प्रूफ के साथ आपके समक्ष रखते है ताकि आपको भी हमारी इस बात की तसल्ली हो जाए   

लेकिन उससे पहले अगर आपको इस टॉपिक के बारे में और जानना चाहते है तो हमारा ये वीडियो अवश्य देखे और नींद से जुडे इस आर्टिकल का पूरा विश्तृत में ज्ञान प्राप्त करें। 




Pygmy Shrew (छछूंदर) 


Pygmy Shrew


दोस्तों, ये जो Pygmy Shrew जो छछूंदर है वोह हर वक्त इधर से उधर भागता दौड़ता रहता है यानी की हर वक्त एक्टिव अवश्था में रहता है। ये प्राणी इसके नाम के अनुशार पिग्मी यानी की वामन है इसका कद 2 इंच यानी 5 सेंटीमीटर तक का ही होता है जैसे की आप ऊपर के फोटो में देख सकते है। उसका वज़न सिर्फ 2 ग्राम होता है उसका जीवनकाल 11 महीनो से अधिक नहीं होता है। जिसके कारन उसकी जो शारीरिक क्रिया है वोह काफी तेज़ी से होती है जैसे की उसके दिल का धड़कना उसका दिल एक मिनट में करि 1100 बार धबकते है।  जिससे उसके शरीर में हर वक्त ऊर्जा यानी एनर्जी की कमी रहती है जिसके कारन उसको हर मिनट में कुछना कुछ खाना अपने शरीर की ऊर्जा को पूरा करने के लिए चाहिए ही चाहिए। अब ऐसे में अगर वोय घंटे भर की नींदलेने लगे तो वोह ऐसे ही भूख के मारे मरजाएगी। तो प्रश्न ये सामने आता है की वोह नींद कब और कितनी लेती है? जब पिग्मी खाना जुटानेकी जद्दोजहद से अपने आपको थका हुआ महसूस करती है तो उस थकावट को दूर करने और अपने शरीर को आराम देने के लिए उसे नींद लेनी पडती है। जोकि आम तौर पे लम्बी नींद की हमें आशंका रहती है लेकिन ऐसा नहीं है। वोह दिनभर की थकान उतारने के लिए सिर्फ दो मिनट की छोटीसी नींद से अपना काम चला लेती है। जबकि हम मनुष्यो को 8 घंटे की नींद चाहिए जबकि हमारी शारीरिक हिलचाल भी पिग्मी से काम है।  

प्राणिओ की नींद के विषय पर काम कर रहे शंशोधको को ये तो पता चल ही गया है की इनकी नींद का सीधा रिलेशन उनकी आवास या उनके जीवन जीने के तरीको पर निर्भर है। जिन प्राणी या पक्षी को जंगल में कोई अच्छी रहनेकी या छिपने की जगह मिल जाए जो की उनको दुसरे हमलावर प्राणिओ से बचा सके उनकी नींद बहुत लम्बी होती है और जिनको अपने बचाव के लिए हर वक्त संघर्ष करना पड़े वोह छोटी छोटी नींद या फिर कम नींद से भी अपना काम चला लेते है। 


Animals में जीने के दो तरीके :

1. यातो जागते रहो.....
2. याफिर छुपकर सोते रहो.....  


जागते रहो... 


African Giraffe

जिराफ: जागते रहो की परंपरा अफ्रीका के जिराफ काफी वर्षो से निभाते आ रहे है। यहाँ पे जिराफ को यहाँ हमेशा यह डर लगा रहता है की वह कही अफ्रीकन शेर का शिकार न बन बैठे और जंगली कुत्तो का भी इसलिए वोह हंमेशा जागते रहो में मानते है। जिराफ आम तौरपे दिन में सिर्फ 2-3 घंटे ही नींद ले पाते है वोह भी एक साथ नहीं Edison की तरह थोड़ी थोड़ी झपकी में। जिराफ नींद 2-3 मिनट की छोटी-छोटी झपकी यो में पूरी करते है। लेकिन उसमे भी उनको यह डर लगा रहता है की वोह किसी का शिकार न बन जाए इसलिए वे बिच-बिच में आँख खोल कर यहाँ-वहाँ देख के ये सुनिश्चित कर लेते है की वोह सेफ है और अपनी दो-तीन घंटे की नींद पूरी कर लेते है। 


Papio Papio Baboon

Papio Papio बबून: वैसे  की टोटल पांच नस्ल है लेकिन ये वाली हट्टे गट्टे शरीर वाले बबून आम तौर पे शेर जैसे हिंशक जानवरो के मेनू कार्ड में शामिल है। इसलिए इनको हर वक्त चौकन्ना रहना पड़ता है। वह ज़्यादातर ग्रुप में ही देखनेको मिलते है। वोह जब नींद लेते है तो बारी-बारी से लेते है यानी थोड़े बबून नींद में होते है और थोड़े पहरा देते है। अगर कोई शिकारी जानवर दिख जाए तो वोह कुत्ते के भोंकनेके जैसा आवाज़ निकालते है और सब बबून शतर्क हो जाते है और पेड़ पर चढ़ जाते है। रात में ये खतरा और भी ज़्यादा बढ़ जाता है इसलिए वे पेड़ पर खड़े-खड़े सो सकते है और ज़रुरत पड़ने पर भागनेकी तैयारी भी रखते है 

Flamingo

Flamingo: फ्लेमिंगो जैसे पानी और ज़मीन पे सहते पक्षिओ को भी जागते रहो को अपनाना पड़ा है। फ्लेमिंगो तो नींद की रूपी साधनामें पराकाष्ठा पार कर चुके है अगर आप भी फ्लेमिंगो के नींद करने के तरीके को जानेंगे तो आप भी चौंक जायेंगे। क्योकि फ्लेमिंगो जैसे शायद ही कोई animals या birds नींद लेते होंगे। उनको इतना चौकन्ना रहना पड़ते है की वह जब अपनी नींद पूरी करते है तब एक आँख खुली रखते है दुशरी आँख से नींद लेते है  और उसके बाद दुशरी आँख खुली रखते है और पहली आँख से नींद लेते है। चोकने वाली बात तो यह है साथो साथ उनका दिमाग भी वैसेही रेस्ट करता है यानिकि आधा दिमाग एक टाइम पे  है और दुशरा आधा उस टाइम काम कर रहा होता है। जो की हम इंसानो से परे है। हम लोग ऐसा करने का सोच भी नहीं सकते और फ्लेमिंगो ऐसेही नींद लेते है। 

Dolphines

Dolphines: ऐसा माना जाता है की हमारे बाद डॉल्फिन्स ही ऐसे है जिसके पास हमारी तरह दिमाग और बुद्धि है। डॉल्फिन्स को अपने आसपास शार्क और दूसरी ऐसी मछलिओंका डर हंमेशा सताता रहता है। इनको क़ुदरतने एक सिस्टम डेवलप करके दी है जोकि फ्लेमिंगो के  जैसे काम करती है। डॉल्फिन्स का आधा दिमाग और एक आँख जब नींद लेते है तो बाकी का आधा दिमाग और दूसरी आँख काम करती है। लेकिन जैसेकि हमारा दिमाग और आँख विपरीत लिंक बनाये हुए है वैसे ही डॉल्फिन्स में भी है यानी की उनकी जब दाहिनी आँख नींद में हो तो उसके साथ उनके दिमाग का बाया हिस्सा नींद ले रहा होता है। जो की हर दो घंटे में चेंज होता रहता है। ये सिस्टम उनको दुषरोंका खाना बनने से भी बाचति है और तैरने और सास लेने में भी हेल्प करती है क्योकि डॉल्फिन्स के पास चुई की बजाए फेफड़े होते है इसलिए उन्हें थोड़ी थोड़ी देर में सतह पर आकर फेफड़ो में हवा भरनी पड़ती है और तैरते वक्त भी डॉल्फिन्स या कोई और मछली नींद नहीं कर सकती क्योकि वे दुब जायेगी इसलिए ये सिस्टम इनको इस तीनो वजह से हेल्पफुल है। 


सोते रहो... 


American Sloth

 अगर आप किसीका स्वादिष्ट भोजन नहीं  बनना चाहते है तो आपके पास दो ऑप्शन है यातो आप जागते रहो और सतर्क रहो या फिर कोई अच्छीसी जगह ढूँढ़के बिना कोई आवाज़ किये सोते रहो। साउथ अमेरिका का जो स्लोथ है वोह भी सोते रहो में विश्वाश रखता है वोह 24 घंटो मेसे 20 घंटे सोताही रहता है उसका दिन सिर्फ 4 दिन का ही होता है। स्लोथ कभी भी ज़मीन पे नहीं उतरता वोह पेड़ पर ही अपना खाना और नींद ले लेते है 

Koala Bear

स्लोथ के जैसे कोआला बेर भी हंमेशा नीलगिरि के पेड़ पेही अपनी पूरी ज़िन्दगी बितादेता है। दोनों जानवर एक ही कुल के है और एक जैसा ही बर्ताव करते है जो की किसी का खाना न बन जाए इसलिए बिना कोई आवाज़ किये बस सोते ही रहते है हर वक्त। इन दोनों की कोई और दूसरे जानवरोंसे मुटभेड़ नहीं होती इसलिए इनका दिमाग भी उतना डेव्लोपेड नहीं है और वोह दोनों दिमाग को इतना तास्ति भी नहीं देते तो आप ही बताइये इनके दिमाग को भला इतनी नींद की आवश्यकता है? इनके मुकाबले और कइसारे जानवर ऐसे है जो की शिकार में महेनत करते है और अपना पेट भरते है। 

Night Bats

आपने कई सारी फिल्मोमें भी देखा होगा की हीरो जब अँधेरी गुफाओ में जाते है या फिर किसी बंध पड़ेहुए घर को खोलते है तब ढेरो चमकादड़ वहासे डरावने तरीकेसे निकलते है। दरहसल चमकादड़ को हमेशा गीध जैसे पंछीओका डर लगा रहता है जोकि काफी हद तक जायज़ भी है इसलिए वे 19 घंटे कोई अँधेरी गुफाओंमें या ऐसी जगह पर सोते रहते है जहा पर कोई लाइट सोर्स ना पहुँच सके। जब सूर्यास्त होने वाला होता है तोह वे बहार निकलते है और डिनर करके फिर सोजाते है। बस ऐसेही चमकादड़ भी सोते रहो का फार्मूला यूज़ करते है और अपना जीवन जीते है। 
 
African Lion

ये सब तो ठीक है लेकिन हमें दिलचस्पी है शेर जैसे जनवारोकि क्योकि आखिर वही जंगल का राजा है। आफ्रिकन शेर लगभग 22 घंटे कुम्भ कर्ण की तरह सोते रहते है। इतनी नींद लेने की और भी एक वजह है शेर जैसे एनिमल्स जब शिकार पर जाते है तब उनकी सबसे ज़्यादा एनर्जी की ज़रुरत पड़ती है इनका सोते रहना एनर्जी को बचानेका एक तरीका भी है। वह शिकार के दो घंटो में अपनी 22 घंटो में जमा की गई साड़ी एनर्जी की खपत कर लेते है और कभी कबार ऐसा भी होता है इतनी एनर्जी वेस्ट करके भी उनको भोजन की प्राप्ति ना हों सके। इसलिए उनको इतनी ज़्यादा नींद की आवश्यकता अवश्य होती ही है। 

दोस्तों इस आर्टिकल में हमने जाना की आपको कितने घंटे सोना चाहिए और कुछ ऐसे महानुभाव के तर्क वितर्क और उनकी नींद के बारे में भी जाना। इन सबसे हमें ये तो पता चलगया की हम सबके लिए नींद अलग-अलग मायने रखती है और हमारे जीवन में उसका एक अलग इम्पोर्टेंस भी है। हमने एनिमल्स और बर्ड्स के नींद के बारे में जानते हुए ये भी सीखा की उनकी नींद उनके जीवन और उनके आसपास के वातावरण के अनुरूप  होती है। 

Thank you Braunupdates

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