प्राणिओ के पास है हमसे अच्छी इन्द्रिया जानिए कैसे? Super Senses of Animals


दोस्तों, एनिमल्स और बर्ड्स हमेशा उसी जगह रहते है जहा पर वह आसानीसे अपना खाना और पानी ढूंढ सके। साथ ही साथ वहा का वातावरण उनको अच्छा लगे।  लेकिन इनके आलावा उनको इस बात का भी ख्याल रखना पड़ता है की उनके आसपास पानी कहा मिलेगा और खाना कहा मिलेगा।  इसके लिए उनको बड़ी जद्दोजहत से गुज़रना पड़ता है।  उनको ये भी ख्याल रखना पड़ेगा की उन्होंने ढूंढा हुआ खाना या पानी और किन जानवरोंसे उनको बचाना पड़ेगा और वोह खुद किसी और का खाना न बजाए ये भि उनको ख्याल रखना पड़ता है।

दोस्तों, इन् सब बातो की वजह से उनको अपनी इन्द्रियों पे ही डिपेंडेंट रहना पड़ता है।  जो की असल में उनके हथियार है।  सायद इसी वजहसे उनकी जो इन्द्रिया है वोह हम इंसानो की पांचो इन्द्रियों से ज़्यादा अच्छी है।  तो चलिए विस्तृत तरीके से जानते है प्राणियों की इन् इन्द्रिओ के बारे में इस आर्टिकल में।



मनुष्य उत्क्रांति थ्योरी 


दोस्तों, मनुष्य उत्क्रांति थ्योरी के मुताबिक मानव वानर से मानव बना है।  जब ये मनुष्य उत्क्रांति प्रोसेस हुई तब हम यानी की मनुष्य जब डेवलप हो रहे  थे  तब हमारी जो इन्द्रिय थी जैसे की आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा काफी सेंसिटिव थी लेकिन जैसे-जैसे हम अपनी बुद्धि से काम लेने लगे वैसे ही हमारी जो इन्द्रियों की सेंसिटिविटी थी वोह कम होती गई और हम उसकी जगह बुद्धि का इस्तेमाल ज़्यादा करने लगे है।  और आज भी पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा बुद्धीमान प्राणी मनुष्य ही कहलाता है। 

लेकिन जो प्राणी और पक्षी है वोह अभी भी बुद्धि से काम नहीं लेते इसलिए वोह  इन्द्रियों का इस्तेमाल करते है इसीलिए उनकी इन्द्रिया हमसे ज़्यादा अधिक अच्छी है और उसे कहा जाता है सुपर सेंसिस (Super Senses ) 


Catfish (बिल्ली मछली)





दोस्तों, इस आर्टिकल की जो पहली सुपर सेन्स है वह है Catfish जिसे हिंदी में बिल्ली मछली भी कहा जाता है उसकी है। यह मीठे पानी में पायी जाने वाली प्रजाति है। ज़्यादातर ये मीठे पानी के सरोवर या मीठे पानी की   नदी में पायी जाती है। इससे Cat यानी बिल्ली इस्सलिये कहा जाता है क्योकि इसके मुँह के आसपास बिल्ली के जैसी मुछे पायी जाती है।  (ऊपर की तस्वीर में आप देख सकते है )

जब विशेषज्ञो ने बिल्ली मछली पर संशोधन शुरु किया तब उनको पता चला की उनके पास सास लेने के लिए फेफड़े भी है। आम तोर पे मछलियों के पास चुई यानी गील होती है। जिसकी मदद से वह मुँह में पानी भर्ती है और चुई की मदद से उससे ऑक्सीजन लेती है। क्योकि बिल्ली मछली के पास चुई कमज़ोर है तोह कुदरत ने उसको फेफड़े दिए है। इस के कारन बिल्ली मछली ज़मीन पर भी कई घंटो तक जीवित रह सकती है। 

तो अब जानते है की बिल्ली मछली के पास ऐसी कोनसी सुपर सेंसिस है जो की हम मानव से ज्यादा  है। 

बिल्ली मछली की सुपर सेंस 




आम तौर पे हमारे पास टेस्ट बड्स यानी की वह इंद्री जिससे हमें खाना अच्छा लगता है।  लेकिन बिल्ली मछली के पुरे  शरीर पर सेकड़ो टेस्ट बड्स होते है। (ऊपर तस्वीर में देख सकते है) हम ये कह सकते है की बिल्ली मछली का पूरा शरीर जीभ की तरह काम करता है। इस मछली के पुरे शरीर पर औसतन ५-७/मिलीमीटर  टेस्ट बड्स पाए जाते है। लेकिन उसकी मुँह पर ज्यादा टेस्ट बड्स पाए जाते है औसतन २५ /मिली मिटर। 

केप्रियो नामक अमरीकी विशेषज्ञ ने अपने प्रयोग में जाना कि बिल्ली मछली  के होंठो पर जो टेस्ट बड्स है वह दूसरे बड्स से ज़्यादा सेंसिटिव है। बिल्ली मछली के टेस्ट बड्स की क्षमता इतनी है की अगर १ लीटर पानी में अगर १ माइक्रोग्राम प्रोटीन है तो भी उसे पता चल जाता है।  तो आप खुद सोच सकते है की उसकी टेस्ट सेंसिटिविटी कितनी है। इसी लिए उसे सुपर सेंस कहा गया है। 


Shark (शार्क)





दोस्त, आम तौर पे मानव भक्षक नाम से पहचाने जाने वाली शार्क मछली की ३०० के करीब प्रजातियां पायी जाती है। ये मानव भक्षक के नाम से इसलिए जानी जाती है क्योकि ये फ़ूड पिरामिड के शीर्ष पे पायी जाती है यानी की ये शार्क हर उस जिव को खा सकती है जो फ़ूड पिरामिड में उसके निचे पाया है। आम तौर पे समंदर में पाया जाने वाला हर जिव फ़ूड पिरामिड में शार्क के निचे ही पाया जाता है। लेकिन ऐसे कम मामले सामने आते है की शार्क खुद किसी जिव का शिकार बन जाए। 

शार्क को फ़ूड पिरामिड में सबसे ऊपर रखने में उसकी इन्द्रियों का बहोत बड़ा योगदान है। अगर आप शार्क की इन्द्रियों को जानने के लिए कोई फिल्म देखना पसंद करे तो आपको जोज़ फिल्म ज़रूर से देखनी चाहीये।  उसमें दिखाई गई धि ग्रेट वाइट शार्क का मुँह २१ फ़ीट लम्बा होता है और शार्क का वजन २२०० किलोग्राम तक का होता है।  तो आप ही सोचीये की इसे मानव भक्षक क्यों न कहा जाए?

धि ग्रेट वाइट शार्क के मुँह में ५-७ सेंटीमीटर लम्बे दांत होते है जो की किसी भी शिकार को चबाने के काबिल होते है। लेकिन जब वह कोई शिकार को चबाती है तो उसके दांत टूट जाते है और थोड़े ही समय में नए दांत आ जाते है। औसतन अपने पूरी उम्र में शार्क के ४५०००-५०००० नए दांत आते है। जो की अविश्वनसीय है।

शार्क की सुपर सेंसिस 




दोस्तों, शार्क की जो सुपर सेंस है वह उसकी नाक है।  हम कह सकते है की उसकी सूंघने की जो शक्ति है वह काफी-काफी बेहतर होती है।  शार्क १०,००,००० लीटर पानी में अगर १ लीटर खून हो तो भी वह उसे परख लेती है और वह भी १ किलोमीटर दूर से ही।

शार्क के नाक के दो छिद्र होते है जैसे की हमारे पास होते है (ऊपर की तस्वीर में देखे ) लेकिन दोनों अलग-अलग सुंघने की शक्ति रखती है। शार्क को जिस तरफ से खोराक की गंध मिलती है उस तरफ वोह एक मिसाइल की तरह चल पड़ती है।  लेकिन अगर उसे नाक के कोई एक छिद्र से कम गंध आये तो वह दुसरे छिद्र की और मुड जाती है। जिससे वह पूरी एक्यूरेसी  शिकार की और बढ़ती है।

कई साल पहले शंशोधको ने एक प्रयोग किया जिसमे उन्होंने एक शार्क के नाक के दोनों छिद्रो मेसे एक छिद्र को प्लग (निष्क्रिय) कर दिया और पानी में उतारा। बाद में थोड़ी दूर खून को पानी में डाला।  लेकिन शार्क पानी में गोल-गोल चक्कर लगाने लगी जैसा की सोचा गया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योकि वह अपने नाक के सिर्फ एक ही छिद्र से खून की गंध मिलरही थी।

शार्क अपने आस पास के जिव के पाचन अंग की गंध भी पहचान लेती है जो की काफी आश्चर्य की बात है।  क्योकि बहोत ही कम जिव के पास ऐसी शक्ति है जो ये कर सकती है।


शार्क का  इलेक्ट्रो विज़न   



जब शार्क अपने शिकार का पता लगा ले और उसके पास पहोच जाए तब वोह अपने एल्क्ट्रो विज़न का इस्तेमाल करती है। तो चलिए जानते है ये इलेक्ट्रो विज़न क्या है?

दरहसल शार्क का जो सबसे कमज़ोर अंग है वह उसकी आँखे है। जब शार्क अपने शिकार के निकट पहुंच जाए तो अपनी आंखोके रक्षण के लिए वह अपनी आँखे बंध करलेती है। लेकिन वह अपने शिकार की इलेक्ट्रिक इमेज अपने मस्तिष्क में बनालेती है। दरहसल ये इस लिए होता है, क्योकि हर जिव से विद्युत सिग्नल पैदा होता है और शार्क उस सिग्नल से अपने मस्तिष्क में अपने शिकार की इलेक्ट्रिक इमेज बनालेति है। 

शार्क की टच सिस्टम 





दोस्तों, शार्क के मुँह से शार्क की लेटरल (पाश्व) लाइन होती है।  जो की उसकी त्वचा के एकदम पतले परत के निचे होती है। जो की एक खड़ी की तरह होती है जिसके निचे सेंसिंग एलिमेंट्स पाए जाते है उस खड़ी में समंदर का पानी सेंसिंग एलिमेंट तक पहुँचता है जिसके कारन समंदर के पानी आने वाली कोई भी तबदीली उसे पता चल जाती है।

अगर शार्क के पास से कोई छोटी मछली आती है और उसकी आंखो से बच जाये तो भी शार्क को पता चल जाता है। जब भी शार्क के पास कोई जिव आये तो पानी में हलचल होती है उसके कारन पानी के दबाव में तबदीली आती है वह तब्दीली शार्क अपने लेटरल लाइन से पहचान लेती है और अलर्ट हो जाती है।

डेवलप्ड बुद्धिमता के साथ हमारा काम इन पांच इन्द्रियों के साथ चल जाता है लेकिन हर वक्त जीने की जद्दो जहत करते इन प्राणिओ को कमसे कम एक सुपर सेन्स की ज़रुरत तो पड़ती ही है। यही वजहों से इनकी दुनिया हमारे लिए काफी रोमांचित और इंटरेस्टिंग लगती है


सारांश 

दोस्तों, हमने आपको इस आर्टिकल में बताया की कैसे प्राणिओ की सुपर सेंस डेव्लोप हुई और हमने कई सारे ऐसे उदहारण भी देखे जो कि हमें काफी इंटरेस्टिंग लगते है तो अब आप जान चुके है की प्राणिओ के पास हमसे अधिक और अच्छी इन्द्रिया क्यों है और उन्हें कैसे वह मिली।
हमारा ये पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए सुक्रिया और अगर आपको ये अच्छा  तो आप हमें निचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बता सकते है 
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